होली के दिन जीजू ने मेरी चूत में रंग लगाकर अपने मोटे काले लंड से मुझे चोदा

हैलो दोस्तो, मेरा नाम हिमांशी है और मैं शिमला की रहने वाली हूँ। मेरे जीजू मुझे कुछ दिन से बार बार काल कर रहे थे वो होली पर मेरी चूत चोदना चाहते थे पर मैं बार बार मना कर देती थी। ऐसा नही है की मैं चुदना नही चाहती थी, मैं भी अंदर से जीजू का मोटा काला लंड अपनी चूत में लेना चाहती थी पर अपनी दीदी से बहुत डरती थी।

मेरी दीदी इन सब मामले में बहुत स्ट्रिक्ट थी। एक बार उनकी गैर मौजूदगी में मैं अपने जीजू के साथ पिक्चर देखने चली गयी थी। मेरी दीदी ने मुझे बहुत डाटा था। मेरे जीजू जी काफी ठरकी मर्द थे और बाहर की औरतो को भी मौका मिलते ही चोद लिया करते थे। मेरी दीदी इस बात को अच्छी तरह से जानती थी। इसलिए वो हमेशा उन पर नजर रखती थी।

फिर से मेरे जीजू का काल आ गया और इस बार मैंने उठा लिया.
“साली साहिबा!! बोलो क्या सोचा तुमने??” वो फोन पर पूछने लगे
“जीजू!! कैसे आप मेरी चूत मारोगे?? दीदी तो हमेशा घर में ही रहती है” मैंने कहा
“कुछ तो जुगाड़ करना होगा। होली का बहाना बनाकर तेरी चूत चोद लूँगा” जीजू ने अपना प्लान बताया

2 दिन बाद ही होली थी, जीजू 1 दिन पहले ही घर आ गये और मेरी दीदी 10 दिन पहले ही हमारे घर आ गयी थी। अगले दिन होली का खेल होने लगा। जीजू का हक होता है की साली को रंग लगाये। जीजू ने सुबह होते ही मुझे रंग लगाना शुरू कर दिया। मेरी दीदी को कोई शक नही हुआ।

फिर जीजू मेरा हाथ दबाने लगे। मैं उनका इशारा समझ गई वो मुझे आँखों से इशारा करके छत वाले कमरे में जाने को कहने लगे।मैं छत वाले कमरे में जाने लगी। जीजू मेरे पीछे पीछे उपर आ गये। यही पर चुदाई का प्लान था उनका।

तभी मेरी दीदी की पुरानी फ्रेंड आ गयी। दीदी उनके साथ बात करने में बिजी हो गयी। अब जीजू के पास 20 30 मिनट आराम से थे। छत वाले कमरे में जीजू आये और मुझे पकड़ के किस करने लगे। आपको बता दूँ की मैं एक मस्त फिगर वाली सेक्सी लड़की हूँ और मेरा बदन भी काफ़ी भरा भरा है। मेरी चूत का दरवाजा अभी तक बंद था।

किसी ने नही खोला था। आज तक किसी का लंड मेरी बुर में गया नही था। जीजू आज मेरी सील तोड़कर मुझे चोदने वाले थे। मेरा फिगर 36 30 38 का था। मेरे दूध बहुत बड़े है और मैं बहुत सेक्सी और गोरी लड़की हूँ। जीजू ने मेरी कमर में हाथ डाल दिया और खड़े खड़े ही मुझे सीने से लगा लिया और खूब चूसा।

मैं कुछ बोलना चाहती थी पर वो मेरे होठो को पी रहे थे। इसलिए मैं कुछ बोल नही सकी। खड़े खड़े उन्होंने मुझे सीने से चिपका लिया था और मेरे गालों को चूमने लगे। मेरे कुर्ते के उपर से उन्होंने चुन्नी हटा दी और मेरे दूध दबाने लगे।

मेरे दूध काफी बड़े थे पर आज तक किसी ने इनको मुंह में लेकर नही चूसा था। मैं “ओह्ह ….ओह्ह …उ उ ह उ उ उ….. आआआआहहहह ….”” करने लगी।
“दीदी को शक तो नही होगा जीजू!!” मैंने कहा
“नही!! चल जल्दी से कपड़े उतार!” जीजू बोले
“ओके! उतारती हूँ” मैं बोली

उसके बाद जीजू मेरे कपड़े उतारने लगे और उन्होंने मुझे पूरी नंगी करदिया और उन्होंने अपने भी कपड़े उतार दिए। उसके बाद उन्होंने मुझे बेड पर लिटा दिया। जीजू को मस्ती चढ़ गयी। उन्होंने हाथ में गुलाबी रंग घोलकर मेरे मुंह पर लगा दिया इसलिए मैं नाराज हो गयी थी।

“जीजू!! ये आपने क्या किया?? गुलाबी रंग तो जल्दी छूटता भी नही है??” मैं मुंह फुलाकर बोली
“साली साहिबा!! मैं तो तेरी चूत में भी आज रंग लगाऊंगा और असली वाली होली खेलूँगा” जीजू हसंकर बोले

मैंने भी उसके मुंह पर डार्क लाल रंग लगाकर उनको भूत बना दिया। उसके बाद वो मेरे होठ चूसने लगे। मेरे लिप्स मल्लिका शेहरावत जैसे थे। जिसे उन्होंने काट काट कर चूसा। फिर मेरी 36” साइज वाली चूचियों को हाथ से मसलने लगे। मैं चुदने को प्यासी होने लगी। “ओहह्ह्ह….अह्हह्हह…अई..अई. .अई… उ उ उ उ उ…” करने लगी। जीजू ने नर्म नर्म चूची को दबा दबाकर मसल डाला। नोच लिया खूब।

फिर मुंह में लेकर मेरे आम चूसने लगे। मैं आहे भरने लगी। कितने दिन से मैं भी जवानी का मजा लूटना चाहती थी। मैं भी दीदी की तरह चुदवाकर यौवन का आनन्द लूटना चाहती थी। जीजू मेरे बड़े बड़े बूब्स को लेकर चूस रहे थे। लगता था की खा ही जाएँगे।

फ्रेंड्स मेरी बूब्स बहुत ही चिकने थे और संगमर्मर जैसे सफ़ेद थे। पर मेरी निपल्स चोकलेटी कलर की थी। जीजू मेरी निपल्स को खींच खींचकर पी रहे थे। मैं पूरी तरह से नंगी थी। मैं अपनी पेंटी भी उतार चुकी थी। मेरी चूत भी अब ज्वालामुखी की तरह आग उगल रही थी और मेरी चूत भी अब जीजू का लंड मांग रही थी।

मैं हाथ लगाकर अपनी चूत को जल्दी जल्दी सहला रही थी। चूत के बड़े से दाने को बार बार हिला रही थी। मुझे बड़ा आनन्द मिल रहा था। मेरे सगे जीजू ने कुछ देर मेरे दोनों बूब्स पीये। फिर मेरे पेट को चाटने लगे फिर मेरी नाभि में जीभ घुसाने लगे। मैं “आआआहहह…..ईईईई….ओह्ह्ह्….अई. .अई..अई…..अई..मम्मी….” “ करने लगी।
“होली के दिन पर आज मुझे आप कसके चोद लीजिये जीजू!!” मैं कहने लगी

वो मेरी नाभि चूसने लगी। मैं और ज़्यादा उतेजित होने लगी। यौवन मेरे उपर हावी हो गया था। वो कुछ देर में नाभि में ऊँगली करने लगे। मेरी कमर को हाथ लगाकर सहलाने लगे। फिर मेरे पैर उन्होंने खुलवा दिए। मेरी चिकनी चूत का दर्शन करने लगे और उनके उपर हवस चढ़ गयी। जीजू ने हाथ में लाल वाला रंग घोला और मेरी चूत पर मल दिया।
“ओह्ह्ह जीजू!! आप भी ना!!” मैं कहने लगी

उन्होंने मेरी पूरी चूत को डार्क लाल रंग से रंग डाला। फिर मुंह लगाकर मेरी बुर पीने लगे। मैं उनको पकड़कर “……आह…मम्मी…..सी सी सी सी.. हा हा हा …..ऊऊऊ ….ऊँ. .ऊँ…ऊँ…उनहूँ उनहूँ…..” करने लगी। मुझे बहुत अधिक नशा मिल रहा था। वो तो पीते ही चले गये।

मेरी चूत में आज उनको सब कुछ मिल गया था। आज मेरी चूत में जीजू को रब दिखने लगा था। काफी देर चाटते रहे। मेरे चूत के दाने को दांत में लेकर काट लिया।
“….ऊँ—ऊँ…ऊँ सी सी सी…जीजू!! आप बहुत ज़्यादा हॉट हो.

उन्होंने 10 मिनट मेरी बुर चाटी और चूत के दाने को चबा चबाकर जख्मी कर दिया। फिर अपने 8”इंच के लंड को हाथ में लेकर फेटने लगे। कुछ देर मुठ देते रहे और अच्छे से खड़ा कर दिया। मेरी चूत में लंड रखा और धमाक से धक्का देकर अंदर डाल दिया। मेरी तो गांड फट गयी और मेरी तो चीखे ही निकल गई।

मेरी सील टूट चुकी थी के और मेरी चूत से खून आरहा था। फिर जीजू फटा फट मुझे चोदने लगे और मैं दर्द से करहाने लगी। थोड़ी देर की चुदाई के बाद मुझे भी मज़ा आने लगा था मैं उनके सामने पूरी तरह से नंगी थी। वो जल्दी जल्दी चुदाई करने लगे।

मैं तो जैसे स्वर्ग में चली गयी। आज मेरी भी कितने सालो की चुदास शांत हो रही थी। जीजू ने धक्के मार मारके पूरा 8”इंच का लंड मेरी चूत की गली में पंहुचा दिया। मैं पैर खोलकर अपनी चूत मरा रही थी। मेरी दोनों चूचियां उपर नीचे जल्दी जल्दी हिल रही थी। जीजू जल्दी जल्दी मेरी बुर चोद रहे थे।

“ओह!! येस येस मजा आ रहा है जीजू !!…ऊँ—ऊँ…ऊँ सी सी सी…अंदर तक लंड घुसाकर चोदो” मैं कामवासना में उत्तेजित होकर बडबडाते हुए बोली

अब जीजू के उपर असली हवस सवार हो गया था। वो और जल्दी जल्दी कमर हिला हिलाकर मुझे चोदने लगे। मेरी दोनों टांगो को उन्होंने उठा लिया और खूब चोदा। फिर जीजू हाफ हांफ कर अपना माल अंदर ही छोड़ दिया। मैं चुद गयी थी। तभी मेरी दीदी की आवाज सुनाई दी। जीजू ने खिड़की से झांककर देखा तो उनकी सहेली जा रही थी।

“साली साहिबा!! जल्दी से कपड़े पहन लॉ!! तेरी दीदी के गेस्ट जा रहे है। वो उपर आ सकती है। बहुत शक्की औरत है वो” जीजू डरकर बोले

मैं जल्दी जल्दी ब्रा पेंटी पहनी। फिर सलवार कुर्ता पहना। जीजू अपनी शर्ट पेंट पहनकर नीचे भाग गये। मैं चुद गयी। दीदी को कुछ पता नही चला। फिर दोपहर होने पर सब लोग बाथरूम में जाकर नहा लिए। शाम को बड़ी चहल पहल थी। अगले दिन मेरे जीजू ने फिर से मुझे चोदने का प्लान बनाया।

“अजी सुनो!! मैं अपनी साली को लेकर मार्किट जा रहा हूँ। तुम्हारे लिए एक अच्छी सी साड़ी लाऊंगा!!” मेरे जीजू मेरी दीदी से बोले
उनको कोई शक नही हुआ। साड़ी का नाम सुनते ही वो मान गयी और मुझे जीजू के साथ मार्किट जाने की परमीशन दे दी। मैं जीजू के साथ कार में बैठ ली। जीजू कार ड्राइव करने लगे। फिर वो मुझे पास के माल में ले गये।

वहां पर उन्होंने मेरी लिए 3 बढ़िया ड्रेस खरीदी और जींस टॉप भी खरीद दिया। शोपिंग करते करते जीजू मुझे टच कर रहे थे। मैं भी उनका साथ निभा रही थी।
ड्रेस चूस करने के बहाने उन्होंने मेरी गांड भी कई बार दबा दी।
“साली साहिबा!!! एक बार फिर से इंजॉय हो जाए??” वो पूछने लगे
“पर कहाँ पर??” मैंने पूछा

“ट्रायल रूम में। वहां पर कैमरा भी नही होता” जीजू बोले
उस शोपिंग माल में बहुत से ट्रायल रूम थे जिसमें कस्टमर ड्रेस पहन कर चेक करते थे। जीजू ने हाथ पकड़ा और लेकर एक ट्रायल रूम में घुस गये। अंदर से दरवाजा बंद कर दिया।

उसके बाद शुरू हो गये और फिर से वो जानवर बनकर मुझे किस करने लगे। मैं भी करने लगे। आज मैं ब्लैक कलर के टॉप और जींस में थी। वो मेरे टॉप के उपर से मेरी चूचियाँ मसलने लगे। मुझे फिर से गर्म कर दिया और मुझे फिरसे नंगी करने लगे.

“साली साहिबा!! होली के त्यौहार में अगर लंड चुस्वाने को न मिले तो मजा नही आता है” वो कहने लगी
मैं उनका संकेत समझ गई। जीजू ने अपना अंडरवियर उतारा और मैं उनका 8” इंच का लंड पकड़कर जल्दी जल्दी फेटने लगी. जीजू खड़े होकर “हूँउउउ हूँउउउ हूँउउउ ….ऊँ…ऊँ…ऊँ सी सी सी… हा हा.. ओ हो हो….” करने लगे। उनको बहुत अधिक आनन्द मिल रहा था।

मैं खूब मुठ दे देकर उनके अच्छे को फेट रही थी। फिर जीभ लगाकर चाटने लगी। जीजू का लंड अपना रस छोड़ने लगा। मैं मुंह लगाकर उनका रस पी गयी। फिर लंड फेट फेटकर स्टील बना दिया और मुंह में लेकर चूसने लगी।
“चूस मेरी रानी!! …..ईईईई….ओह्ह्ह्….और मेहनत से चूस!! मजा आ रहा है!!” जीजू आँख बंदकर बोले

मैं उनके 8” इंच के लंड को गले तक लेकर चूसने लगी। जीजू को खूब मजा दिलवा दिया। उसके बाद उन्होंने मुझे ट्रायल रूम के फर्श पर लिटा दिया और 15 मिनट मेरी बुर चाटी। चूस चूसकर पानी निकाल दिया। जीजू मेरी चूत में ऊँगली डाल डालकर मुझे उत्तेजित करने लगे। मैं भी मजे लेकर करवा रही थी।

“साली साहिबा!! अब तुम घोड़ी बना जाओ!!” जीजू बोले
मैं ट्रायल रूम में ही घोड़ी बन गयी। जीजू को मेरी गर्म चिकनी चूत की मीठी मीठी सुगंध आ रही थी। वो पीछे से चूत चाटने लगे। मेरी फुद्दी बड़ी ही सेक्सी दिख रही थी।

जीजू ने पीछे से भी मुझे बहुत सताया। मुझे खूब ऊँगली की। उसके बाद फ्रेंड्स उनका अगला शिकार मेरी गांड बन गये। मेरी गांड को हाथ लगा लगाकर जीजू किस करने लगे। मुझे गुदगुदी होने लगी। जीजू मेरी गांड को हाथ से दबा दबाकर मजा लेने लगे। फिर मेरे सफ़ेद गद्देदार चूतड़ को दांत लगाकर काटने लगे।

“ओह्ह जीजू!! आप भी कमाल है!”
फिर कुछ देर पीछे से मेरी चूत चाटते रहे और फिर अपना 8”इंच का मोटा लंड मेरे अंदर डाल दिया। मेरी कमर पकड़ कर जीजू मुझे चोदने लगे। मैं “उ उ उ उ उ……अअअअअ आआआआ… सी सी सी सी….. ऊँ…ऊँ…ऊँ….” करने लगी। जीजू जल्दी जल्दी चोदने लगे। मैं तो पागल हुई जा रही थी। जीजू के धक्के तो मेरा बुरा हाल बना रहे थे।

मैं अच्छी चुदक्कड लड़की की तरह घोड़ी बनी हुई थी। खूब चुदी मैं जीजू से। वो बार बार मेरे सेक्सी चूतड़ो को सहलाकर मजा ले रहे थे। उन्होंने ट्रायल रूम में ही मेरे साथ सुहागरात मना डाली।
उसके बाद लंड मेरी चूत के छेद से बाहर निकाल लिया। मैं घोड़ी बनी रही क्यूंकि मैं जानती थी की अभी पिक्चर बाकी है।

जीजू फिर से मेरी चूत का रसीला छेद चाटने लगे। वो जीभ जैसे जैसे फिराते थे मुझे चुदासी सी चढ़ जाती. मैं मचल रही थी। मुझे वासना का खुमार चढ़ता ही जा रहा था। मर्दों को औरत की बुर से इतना प्यार, इतना लगाव क्यों होता है मैं घोड़ी बने बने सोच रही थी।

जीजू की वासना तो खत्म होने का नाम ही नही ले रही थी। मेरी चूत का छेद उनको आज बेहद प्रिय लग रहा था। मुंह लगाकर ऐसे पी रहे थे जैसे उसमे आम का मीठा रस भरा हो। मैं तो लम्बी लम्बी सिस्कारियां लेकर “ओह्ह ….ओह्ह…उ उ ह उ उ उ….. आआआआहहहहहहह ….” कर रही थी। मेरी मादक जोशीली सिस्कारियां पूरे ट्रायल रूम में गूंज रही थी।

“साली साहिबा!! अब तेरी गांड की बारी है” जीजू बोले और अब मेरी गांड को चाटने लगे। उसमें थूक दिया और मस्ती से चाटने लगे। अब की बार फिर से मैं पागल होने लगी। फिर जीजू ने 7 8 मिनट मेरी गांड मुंह लगाकर पी ली। फिर उसमे अपना 8” इंच मोटा लंड घुसेड़ दिया और जल्दी जल्दी चोदने लगे। मैं दर्द में कराहने लगी। मैं रोने लगी और बड़े बड़े मोटे मोटे आशू आँख से बहने लगे।

“जीजू!! प्लीस मुझे छोड़ दो!! …अई..अई. .अई… उ उ—मेरी गांड मत मारो!! प्लीस मुझे जाने दो” मैं रो रोकर कहने लगी
“माधरचोद!! तू मेरी साली है रंडी बहन की लौड़ी। साली आधी घरवाली होती है। तेरी गांड तो मैं चोदकर रहूँगा” जीजू वहशी दरिंदा बनकर बोले और काफी देर मेरी गांड मारते रहे।

उनके लंड का पूरा टोपा मेरी गांड में घुसकर कोहराम मचा रहा था। मैं दर्द में “ओहह्ह्ह….अह्हह्हह…अई..अई. .अई… उ उ उ उ उ…” चिल्ला रही थी। जीजू तो मजे लूट रहे थे। आखिरकार वो बड़े देर बाद झड़ गए।

मेरी कसी गांड में ही माल गिरा दिए और फिर लंड बहार निकाल लिया। अब जाकर मुझे चैन मिला। फिर दोनों ने जल्दी जल्दी कपड़े पहने और शोपिंग माल के ट्रायल रूम से बाहर आ गये। आज जीजू ने मेरी चूत और गांड दोनों मार ली थी। मैं लंगड़ा लंगड़ा कर चल रही थी। जीजू ने मुझे कार में बिठाया फिर एक दवा की दूकान से बदन दर्द की दवा खरीदी।

जीजू मुझे एक अच्छे रेस्टोरेंट ले गये, जहाँ पर उन्होंने एक गर्म गिलास दूध आर्डर किया मेरे लिए। मैंने पी लिया। फिर उनके साथ घर आ गयी।मेरे दर्द को ठीक होने में 3 दिन लग गये। उसके बाद जीजू ने फिर से मेरी चूत मारी और गांड को भी नही बक्शा।

2 thoughts on “होली के दिन जीजू ने मेरी चूत में रंग लगाकर अपने मोटे काले लंड से मुझे चोदा”

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